[ पेपर आई.डी. : 69547 ] भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हिंदी दलित साहित्य की दशा और दिशा
पेपर की जानकारी : प्रस्तुत करने की तिथि: Sep 21, 2025, पुनरीक्षण की तिथि: Oct 10, 2025, स्वीकार करने की तिथि: Oct 27, 2025, डी.ओ.आई. : https://doi.org/10.56815/ijmrr.v4i4.2025.148-154, कैसे उद्धृत करें: सुरेश कुमार (2025). भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हिंदी दलित साहित्य की दशा और दिशा. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड रिव्यूज, 4 (4) 148-154
Abstract
भारतीय दलित साहित्य अकादमी के प्रकाशन की एक महत्वपूर्ण संपादित पुस्तक है, जिसका प्रथम संस्करण— 26 जनवरी 2003 में प्रकाशित हुआ। इस पुस्तक का संपादन प्रसिद्ध दलित साहित्यकार डॉ० माता प्रसाद ने किया है, जिसमें डॉ० सोहन पाल सुमनाक्षर, डॉ० जय प्रकाश कर्दम, कँवल भारती, डॉ० अवन्तिका प्रसाद मर्मट, डॉ० धर्मवीर, डॉ० दयानन्द बरोही, डॉ० मुद्रा राक्षस, डॉ० कुसुम वियोगी, श्री रमणिका गुप्ता, शरण कुमार लिम्बाले आदि 18 दलित साहित्यकारों एवं विद्वानों के दलित साहित्य के इतिहास, साहित्य, सौन्दर्यशास्त्र पर लेख संकलित हैं।
पुस्तक में प्रथम लेख, ‘दलित साहित्य का आन्दोलन’ में डॉ० सोहन पाल सुमनाक्षर जी ने दलित साहित्य का सामाजिक, ऐतिहासिक, अन्वेषण करते हुए पूर्व वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, मध्यकाल और आधुनिक काल में विभाजित किया है। इस लेख में डॉ० सुमनाक्षर ने पूर्व वैदिक काल में अनार्य, दास, दस्यु को शूद्रों का पूर्वज बताते हुए उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के सामाजिक प्रतिबंध, मध्यकाल में बौद्ध और जैन धर्म आन्दोलन से उपजे सिद्धनाथ और संत-साहित्य की चर्चा करते हैं। आधुनिक काल में वे डॉ० अम्बेडकर के दलितोत्थान आन्दोलन से उपजे मराठी दलित साहित्य और बाद में हिन्दी दलित साहित्य का ऐतिहासिक क्रम प्रस्तुत करते हैं।













