[6] छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की धार्मिक पृष्ठभूमि : राम के विशेष सन्दर्भ में
पेपर की जानकारी : प्रस्तुत करने की तिथि: Mar 20, 2026, पुनरीक्षण की तिथि: Mar 31, 2026, स्वीकार करने की तिथि: Apr 04, 2026, डी.ओ.आई. : https://doi.org/10.56815/ijmrr.v5i4.2026.52-62, कैसे उद्धृत करें (How to Cite): श्रीमती संगीता शर्मा (2026). छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की धार्मिक पृष्ठभूमि : राम के विशेष सन्दर्भ में. International Journal of Multidisciplinary Research & Reviews. 5(4), 52–62.
Abstract
(सारांश): मानव जीवन सुख दुःख की गाथा से जुड़ा हुआ है। जब कोई हर्ष या विषाद की घटना अप्रत्याशित रूप से घटित होती है, तब मन में वीणा के तार झंकृत हो उठते हैं। मानव मन से उसकी रसात्मक अनुभूति अनायास ही फूट निकलने को व्यग्र हो उठती है। छत्तीसगढ़ में लोक गीतों का विपुल भंडार है। छत्तीसगढ़ी लोक गीतों में सरलता के साथ-साथ भावनाओं की प्रबलता, सरसता तथा रागात्मकता के दर्शन होते हैं जो परम्परा विश्वास और धारणाओं से समृद्ध हैं। छत्तीसगढ़ धार्मिक भावना से ओतप्रोत है। यहाँ का जनमानस ईश्वर के अस्तित्व को किसी न किसी रूप में स्वीकार करता है। यहाँ की लोक संस्कृति में धर्म का विशेष स्थान है।
भारतीय वाङ्मय के आदि स्रोत के रूप में राम कथा विख्यात है। अपने उद्गम से अनेक रूपों में परिवर्तित होती हुई सूक्ष्म से विराट रूप धारण करती हुई मानव जीवन को मानवता के महत्तर आदर्शों एवं असाधारण मानव मूल्यों के प्रति आकर्षित करने वाली राम कथा जन-जन के मानस में समाहित है। छत्तीसगढ़ी लोक गीतों में भी श्री राम आत्मा की तरह अवस्थित हैं। लोक जीवन में राम रचे हुए हैं। लोक का सम्पूर्ण जीवन ही राममय है। जीवन के हर सुख और दुःख में वह राम का ही स्मरण करता है। छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में जहाँ श्री राम का व्यक्तित्व पुराणसम्मत तथा वाल्मीकि और तुलसी से विशेष रूप से प्रभावित है वहीं जनमानस की कल्पनाशीलता ने उसे नवीन रूपों में प्रतिष्ठापित किया है।













