[6] दिव्यांगता एवं शिक्षा
How to Cite the Article: सत्येन्द्र कान्द्त मौयय(2026). दिवयाांगता एवां शिक्षा. International Journal of Multidisciplinary Research & Reviews, 5(5),82-89. https://doi.org/10.56815/ijmrr.v5i5.2026.82-89
Abstract
किसी व्यक्ति के सामाजिक, मानसिक एवं आर्थिक विकास के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता मानी जाती है। मानव इतिहास के आदिकाल से शिक्षा का विविध तरह से विकास एवं प्रसार होता रहा है। प्रत्येक देश अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक अस्मिता को अभिव्यक्त करने तथा स्वीकृति के लिए और साथ ही साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए विशिष्ट शिक्षा प्रणाली विकसित करता है।
इसी प्रकार भारतीय संविधान में भी अनुच्छेद-21 (क) के अन्तर्गत देश के सभी निवासियों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। निःशक्त व्यक्ति अधिनियम 1995 को ध्यान में रखते हुए 18 वर्ष से कम आयु के सभी दिव्यांग बच्चों को अनिवार्य एवं मुक्तशिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
जनगणना-2011 के अनुसार देश की 45 फीसदी दिव्यांग आबादी अशिक्षित है। दिव्यांगों में जो शिक्षित है, उनमें 59 फीसदी 10वीं पास है, जबकि देश की कुल आबादी का 67 फीसदी 10वीं तक शिक्षित है।













