[ पेपर आई.डी. : 29507 ] वैदिक कर्मकाण्ड और आचार्य दयानन्द
कर्मकाण्ड विधि विषयक आचार्य दयानन्द की दो ग्रन्थ एक संस्कार विधि दूसरा पंच महायज्ञ विधि। उसके अलावा सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका में यथोचित वर्णन है। संस्कार विधि में दैनिक अग्निहोत्र को सामान्य प्रकरण में लिखते हुए उसका लगभग सभी संस्कारों के साथ विधिवत कर दिया है। ऋषि दयानन्द संस्कार विधि को कर्मकाण्ड का ग्रन्थ स्वीकार करते हुए लिखते हैं—
“इसमें प्रथम ईश्वर की स्तुति—प्रार्थना—उपासना, पुनः स्वस्तिवाचन, शान्ति प्रकरण, तदनन्तर सामान्य प्रकरण, पश्चात् गर्भाधानादि अन्त्येष्टि पर्यन्त सोलह संस्कार क्रमशः लिखे हैं, और यहाँ सब मन्त्रों का अर्थ नहीं लिखा है, क्योंकि इसमें कर्मकाण्ड का विधान है। इसलिए विशेषकर क्रिया-विधान लिखा है।”
इस शोध पत्र में हम निम्न बिन्दुओं पर विचार रखेंगे—
कर्मकाण्ड (विधि) के अन्तर्गत आचार्य दयानन्द किन-किन विषयों को मान्य करते हैं?
अग्निहोत्र विधि में अन्य सनातन विधि से क्या भिन्नता है और क्यों?
क्या दयानन्द यज्ञ विधि-विधान हेतु ज्योतिष को मानते हैं? या सनातन वैदिक शगुन विचार में अपना सिद्धान्त भिन्न रखते हैं।
दयानन्द ने अपने विचार से वैदिक परम्परा की स्थापना की है अथवा सम्प्रदायवाद की स्थापना की है—किंचित विमर्श।