IJMRR - International Journal of Multidisciplinary Research & Reviews
Int. J. Multidiscip. Res. Rev.
DOI Prefix: 10.56815
I J M R R
Int. J. Multidiscip. Res. Rev.

International Journal of Multidisciplinary Research & Reviews

Peer Reviewed | UGC Compliant | High Impact Factor | Scientific Journal

ISSN: 2945-3135 | High Scientific Impact | UGC-CARE Followed
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DOI DOI Prefix: 10.56815
Vol. 5 (2026) No. 3: March (2026)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में वैचारिक ध्रुवीकरण और संस्थागत वर्चस्व: पुरुषोत्तम दास टंडन चुनाव (1950) एवं नेहरू-पटेल द्वैध शासन का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Dr.Bablu Kumar Jayswal

यह शोध पत्र स्वतंत्रता के तत्काल बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर उभरे आंतरिक सत्ता-संघर्ष और वैचारिक ध्रुवीकरण का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। शोध का केंद्रबिंदु 1950 का कांग्रेस अध्यक्षीय चुनाव है, जहाँ पुरुषोत्तम दास टंडन (पटेल समर्थित) और जे.बी. कृपलानी (नेहरू समर्थित) के बीच का मुकाबला मात्र दो व्यक्तियों की प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि दो भिन्न 'भारत दृष्टियों' का टकराव था।अध्ययन यह रेखांकित करता है कि कैसे जवाहरलाल नेहरू की धर्मनिरपेक्ष-समाजवादी आधुनिकता और सरदार वल्लभभाई पटेल के यथार्थवादी-पारंपरिक राष्ट्रवाद ने पार्टी के भीतर एक 'द्वैध शासन' (Diarchy) जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी थी। टंडन की जीत ने प्रारंभिक तौर पर पार्टी संगठन पर पटेल के सांगठनिक नियंत्रण को सिद्ध किया, किंतु पटेल के निधन के उपरांत नेहरू द्वारा टंडन को पद छोड़ने पर विवश करना, कांग्रेस के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।यह शोध तर्क देता है कि इस प्रकरण ने न केवल पार्टी के भीतर 'दक्षिणपंथी' प्रभाव को कमजोर किया, बल्कि भविष्य के लिए यह सिद्धांत भी स्थापित कर दिया कि लोकतांत्रिक ढांचे में प्रधानमंत्री का पद पार्टी अध्यक्ष के पद से अधिक प्रभावशाली होगा। अंततः, यह पत्र निष्कर्ष निकालता है कि टंडन का इस्तीफा और नेहरू का अध्यक्ष पद संभालना, कांग्रेस के 'सामूहिक नेतृत्व' के दौर के अंत और 'नेहरूवादी सर्वसम्मति' के युग के उदय का प्रतीक था।

Keywords:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेहरू-पटेल द्वैध शासन पुरुषोत्तम दास टंडन आंतरिक लोकतंत्र वैचारिक ध्रुवीकरण सांगठनिक वर्चस्व राजनीतिक संक्रमण।