भारतीय ज्ञान प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम रूपांतरण एवं क्षमता निर्माण: समकालीन राजनीतिक चुनौतियाँ
वर्तमान वैश्वीकरण, तकनीकी नवाचार तथा लोकतांत्रिक जटिलताओं के दौर में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया बहुआयामी हो गई है। अब यह केवल आर्थिक वृद्धि या राजनीतिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहकर ज्ञान, मूल्य, कौशल और मानवीय क्षमता के समन्वित विकास पर आधारित होती जा रही है। ऐसे संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली, जिसमें समग्रता, नैतिकता, लोककल्याण, सहअस्तित्व और सतत विकास के सिद्धांत निहित हैं, समकालीन राजनीतिक चुनौतियों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रस्तुत करती है। यह शोध पत्र ज्ञान-आधारित राष्ट्र निर्माण की अवधारणा के संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण करता है तथा शैक्षिक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम रूपांतरण एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से राजनीतिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व विकास एवं लोकतांत्रिक सुदृढ़ता को सशक्त बनाने की संभावनाओं का अध्ययन करता है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यपरक एवं व्यवहारिक आयामों को समाहित किया जाए, तो एक उत्तरदायी, सहभागी एवं समावेशी राजनीतिक संस्कृति का निर्माण संभव है।